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कितना सुंदर लिखा है, किसी ने...

प्यास लगी थी गजब की, मगर पानी में ज़हर था... पीते तो मर जाते,

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Naresh Bhattarai

16 Jul 2026

⏱ 1 मिनेट 👁 178 💬 0

कितना सुंदर लिखा है, किसी ने...

प्यास लगी थी गजब की,

मगर पानी में ज़हर था...

पीते तो मर जाते,

और ना पीते तो भी मर जाते!!

बस यही दो मसले,

ज़िंदगी भर ना हल हुए,

ना नींद पूरी हुई,

ना ख़्वाब मुकम्मल हुए!!

वक्त ने कहा...

काश थोड़ा और सब्र होता।

सब्र ने कहा...

काश थोड़ा और वक्त होता।

शिकायतें तो बहुत हैं तुझसे ऐ ज़िंदगी,

पर चुप इसलिए हूँ कि जो दिया तूने,

वो भी बहुतों को नसीब नहीं होता...!!

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